27 जनवरी से शुरू होगा जुगनू स्पोर्ट कलब का टूर्नामेंट ||Special Story||

SPECIAL STORY OF VILLAGE

 KAULA CHHAPER


राष्ट्रिय टीम में खेलने वाले खिलाड़ियों में ऐसे कई खिलाड़ी होते है जो देश के दूर दराज इलाको से आते है जहा बिजली, पानी की भी किल्लत होती है। मगर इन दूर दराज इलाको के खेतो और गलियों से निकल कर जब ये खिलाडी विश्व पटल पर पहुंचते है तो अपनी हुनर से सबको चौका देते है।
प्रतीकात्मक चित्र 

उत्तर प्रदेश के देवरिया जिला के कौला छापर गांव ने प्राकृतिक कहर के कई सुबह देखे है। इस गांव में कई बार बाढ़ और सूखे ने अपने चपेट में लिया। गांव में जीविका के संसाधन न होने के कारण गांव के अधिकतर युवा  विदेशो में चले जाते है, मगर इस गांव के लोगो में ने अपने भीतर खेल के प्रति अपनी रूचि को जिन्दा रखा।

इस गांव की सबसे प्रचलित खेल बालीबाल है। इस गांव के एक ग्रामीण ने बताया की इस गांव में पिछले तीन पुस्तो से बालीबाल का खेल खेला जा रहा है। गांव की टीम ने गांव से बहार कई मंडलीय और राजकीय टुर्नामेन्ट भी खेले है।

हर साल की तरह इस बार भी गांव में एक टूर्नामेंट का आयोजन हो रहा है, जो 27 जनवरी से खेला जायेगा। दो दिन तक चलने वाले इस टूर्नामेंट में कई जिलों की टीम आ रही है। आयोजक ने बताया की  यह एक मंडल स्तरीय टूर्नामेंट है।

गांव के हर वर्ग के लोग इस तरह के टूर्नामेंट में हिस्सा लेते है। गांव में होने वाले इस टूर्नामेंट में जिले के विधायक, ब्लाकप्रमुख और समाजक कार्यकर्त्ता भी आते है।

टूर्नामेंट के एक आयोजक सदस्य ने बताया की इस बार इस टूर्नामेन्ट की जिम्मेदारी आफताब मास्टर,पत्रकार आफताब, साबिर,सद्रेआलम, लखमुद्दीन, अजरुद्दीन, फहीम, अली पठान, टीपू(मसीउज्जमा), रेहान,नसीम और बाकि के युवा ग्रामीणों को दी गई है।

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