जब Indian Army ने किया विदेशी धरती पर ऑपरेशन

जब Indian Army ने किया विदेशी धरती पर ऑपरेशन

शौर्य और वीरता की गाथा लिखने वाली भारतीय सेना(Indian Army) की वीरता और विजय की कई कहानिया इतिहास के किताबो में दर्ज है जब भी आवश्यकता पड़ी सेना(Army) ने देश की सरहदों की हिफाजत की। मगर भारतीय सेना(Indian Army) का इतिहास महज इतना ही नहीं है.

 भारतीय सेना(Indian Army) ने न सिर्फ देश में बल्कि विदेशो में भी कई सफल ऑपरेशन किये है आज हम आपके सामने भारतीय सेना के कुछ ऐसे ही ऑपरेशन की बात करेंगे। जिसे हमारी सेना ने विदेशी धरती पर अंजाम दिया था.


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Indian Army During Training

3.ऑपरेशन मैत्रेय(Operation Maitre)-

 नेपाल में जब अप्रैल 2015 में भूकंप आया तो वहा भारी तबाही हुई। करोडो का नुकशान हुआ, एक पडोसी देश होने के कारन भारत(India) ने भूकंप में महज १५ मिनट बाद ही नेपाल में अपनी सेवा देनी शुरू कर दी। भूकंप के बाद नेपाल में भारी त्रासदी हुई हजारो लोग अलग अलग जगह फसे थे, रास्ते टूट चुकी थी,
 कई जगह गाड़िया आ जा नहीं सकती थी  सेवा देने वाला भारत पहला देश था.

 भारत की वायु सेना(Indian Air Force) ने ऑपरेशन मैत्रेय के तहत नेपाल में हजारो लोगो का रेस्क्यू किया। 4 दिन तक चलने वाले इस ऑपरेशन में राहत सामग्री बाटे गए।

 भारत की तरफ से नेपाल में भारतीय वायु सेना ने 10 टन कम्बल,50 टन पानी, 2 टन मेडिसिन और 22 टन से ज्यादा खाने की सामग्री पहुंचे। वायु सेना की इस ऑपरेशन में काम कम आठ Mi-17 हेलीकाप्टर का इस्तेमाल किया गया था इसके आलावा C -130J हरक्यूलिस, C -17 ग्लोबमास्टर का भी इस्तेमाल किया गया था।
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Indian Air Force delevering Food During 2015 Nepal Eath Quack.

2.ऑपरेशन कैक्टस(Operation Cactus)-

 1988 में लगभग 200  पीपल्स लिबरेशन ऑर्गेनाइजेशन ऑफ तमिल ईलम  के श्रीलंकाई आतंकियों ने मालदीव पर हमला कर दिया, हमलावर स्पीड बोट के सहारे पर्यटक के भेष में मालदीव पहुंचे थे।


 जिसके बाद मालदीव की तरफ से आए इमरजेंसी मैसेज के 9 घंटे बाद ही भारतीय सेना(Indian Army) के कमांडो मालदीव गए थे और कुछ ही घंटों में सब कुछ अपने नियंत्रण में लिया और तख्तापलट को नाकाम कर दिया। श्रीलंका में कारोबार करने वाले मालदीव के अब्दुल्लाह लथुफी ने उग्रवादियों के साथ मिलकर तख्ता पलट की ये योजना बनाई थी।
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Indian Army With Attacker after operation Cactus

 3 नवंबर 1988 की रात को ऑपरेशन कैक्टस उस समय शुरू किया गया जब मालदीव के प्रमुख सरकारी भवन, एयरपोर्ट, बंदरगाह और टेलिविजन स्टेशन पर उग्रवादियों ने नियंत्रण में ले लिया था।

तब भारतीय वायुसेना ने भारतीय सेना(Indian Army) की पैराशूट ब्रिगेड के करीब 300 जवानों को माले पहुंचाया। नौ घंटे के भीतर ही नॉन स्टॉप उड़ान भरते हुए भारतीय सेना हुलहुले एयरपोर्ट पर पहुंची। यह एयरपोर्ट माले की सेना के नियंत्रण में था।

भारतीय सेना(Indian Army) की इस मौजूदगी ने उग्रवादियों के मनोबल को तोड़ दिया। इसी दौरान भारतीय सेना ने सबसे पहले माले एयरपोर्ट को अपने नियंत्रण में लिया और राष्ट्रपति गय्यूम को सुरक्षित किया।

मालदीव की जमीन पर हुए इस ऑपरेशन कीअगुवाई पैराशूट ब्रिगेड के ब्रिगेडियर फारुख बुलसारा कर रहे थे।दो दिन के भीतर पूरा अभियान खत्म हो गया। भारत के इस कार्रवाई को संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका और ब्रिटेन समेत कई देशों ने तारीफ की लेकिन श्रीलंका ने इसका कड़ा विरोध किया। माले में ऑपरेशन कैक्टस आज भी दुनिया के सबसे सफल कमांडो ऑपरेशनों में गिना जाता है।

1.इंडो-पाक वॉर1971-

  आज़ादी के बाद से ही पूर्वी पाकिस्तान(बांग्लादेश) के लोगो में असंतोष पनपने लगा इसका एक कारण पाकिस्तान की सरकार का पूर्वी पकिस्तान से पश्चपात पूर्ण रवैया। 1971 पूर्वी पाकिस्तान में असंतोष अब गृह युद्ध का रूप ले लिए था।

 लाखो की तादाद में लोग अपना घर बार छोड़कर भारत (India) के तटीय राज्य असम में शरण लेने लगे थे। जिसके कारण असम के हालत दिन ब दिन बिगड़ने लगी थी।हलाकि इसके बावजूद भी भारत(India) की सीमावर्ती राज्यों में आने वाले शरणार्थियो के लिए दरवाजे खोले गए और उनके लिए कैम्प भी लगाए गए।

भारत की तत्कालीन इंदिरा सरकार ने विभिन्न अंतराष्ट्रीय मंचो पर इस मुद्दे को उठाया मगर इसका कोई खास परिणाम नहीं मिला। भारत पूर्वी पाकिस्तान का स्थायी समाधान छटा था इसलिए उसने बांग्लादेश मुक्ति मोर्चा का
समर्थन किया।

अप्रैल 1971 में भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने सेना प्रमुख (Army chief) मानेकशॉ से भारत के पाकिस्तान से युद्ध करने की तैयारी के बारे में चर्चा कर ली थी और दिसंबर आते आते युद्ध की दशा तैयार हो गयी। 3 दिसम्बर 1971 से 16 दिसम्बर 1971 तक चले इस युद्ध में पाकिस्तान की सेना 13 दिन में ही गुठनो के बल आ गयी थी। भारत के 5 लाख सैनिक के साथ बांग्लादेश की 1 लाख 75  सैनिक भी इस युद्ध में  लड़ रहे थे।
Pakistani Journa AA Niyaji with Jagjeet Singh Aror(first row right to left)

 16 दिसम्बर को पाकिस्तान के जनरल ए ए नियाजी ने ढाका में आत्मसमर्पण का दिया। इस युद्ध में पाकिस्तान को भारी नुकसान उठाना पड़ा था इसके साथ की पूर्वी पाकिस्तान पक्षिमी पाकिस्तान से अलग हो कर बांग्लादेश बन गया। दुनिया के इतिहास में दो देशो के बीच लड़े युद्धों में ये सबसे कम दिन तक चलने वाले युद्ध में से एक था।
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