तीन नाम जिनमे देश तलाश रहा राजनितिक भविष्य

Kanhaiya Kumar, Umar Khalid, Chandshekhar Azad

कन्हैया कुमार(Kanhaiya Kumar), उमर खालिद(Umar Khalid) और चंद्रशेखर आज़ाद(Chandrshekhar Azad) का नाम मीडिया में विपक्ष के नेताओ से भी ज्यादा सुना जा रहा है. भारत(India) की राजनीती में आंदोलन से अपनी जमीन बनाने वाले इन युवा नेताओ का संघर्ष और विवादों से गहरा नाता है.

किसी भी लोकतान्त्रिक देश में एक मजबूत विपक्ष होना जरुरी है, जो सत्ता के मनमाने फैसलों पर अंकुश लगाए। मगर 2014 के बाद से ही भारत(India) की राजनीती में विपक्ष की मौजूदगी न के बराबर है। इसी बीच देश के अलग-अलग हिस्सों से कुछ ऐसे युवा निकले है जिनमे देश की बड़ी आबादी आने वाले समय का नेता के रूप में देखती है।

 बड़ी बात ये है की इन युवाओ ने मुख्य धारा की राजनीति से दूर रहते हुए अपनी अलग पहचान बनाई है। हलाकि की इनकी पहचान पर कई विवादों के बादल छाए हुए है। इन लोगो में तीन नाम जो सबसे आगे है वो है कनैहया कुमार(Kanhaiya Kumar), उमर खालिद(Umar Khalid) और चंद्रशेखर आज़ाद(Chandrshekhar azad)। अगर ये कहे की विवादों की वजह से ही दुनिया ने इन्हे जाना तो गलत नहीं होगा.
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Chandrashekhar Azad

चंद्रशेखर आजाद(Chandrshekhar Azad) की छवि एक दलित नेता के तौर पर होती है उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में जन्मे चंद्रशेखर, ने वकालत की पढ़ाई की है मगर मुझे पहचाने दलित नेता के तौर पर ही देखी जाती है.

  भीम आर्मी(Bhim Army) की स्थापना करने वाले चंद्रशेखर आज़ाद (chandrshekhar Azad) का पर सहारनपुर(Saharanpur) में जाति हिंसा भड़काने के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था उन्हे NSA के तहत जेल में भी डाल दिया गया था। लेकिन बाद में इलाहाबाद आई कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी।

 पश्चिमी उत्तर प्रदेश से निकलने वाले भीम आर्मी ने दलितो के बीच बिना चुनाव लड़े ही  ऐसी पड़ बना ली है कि CAA के खिलाफ होने वाले पर प्रदर्शन में  चंद्रशेखर आज़ाद(Chandrshekhar Azad) के फोटो दिल्ली से लेकर आसाम और केरल में भी प्रदर्शनकारियो के हाथों में देखे जा सकते हैं।

 दिल्ली में  जामा मस्जिद गेट पर हुए CAA के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल होने के बाद से ही दिल्ली पुलिस ने चंद्रशेखर अज़ाद (Chandrshekhar Azad) को गिरफ्तार कर लिया । हालाकी उनके गिरफ्तारी के बाद #releaseazad हैसटैग से हज़ारो लोग ट्वीट कर रहे  थे. बाद में दिल्ली के तीस हज़ारी कोर्ट ने उन्हें कुछ शर्तो के साथ जमानत दे दी 
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Umar Khalid(left) Kanhaiya Kumar (Right)

अब बात करते है उमर खालिद(Umar Khalid) और कनैह्या कुमार(Kanhaiya Kumar) की। ये दो नाम फरवरी 2016 में सामने आये और उसके बाद से इन नामो को न्यूज़ चैनल पर खूब लिया गया। फरवरी 2016 में JNU में हुए एक प्रोटेस्ट में देश विरोधी नारे लगाने का आरोप लगा। 

एक पराईवेट न्यूज़ चैनल ने एक वीडियो चलाया जिसमे कहा गया की JNU में हुए प्रोटेस्ट में  'पाकिस्तान जिंदाबाद' के नारे लगाए गए थे। जिसे कई दूसरे फैक्ट चेकर वेबसाइट पर और दूसरे न्यूज़ चैनल ने डॉक्टरेड वीडियो बताया। कन्हैया कुमार (Kanhaiya kumar) उस समय JNU छात्र संग के अध्यक्ष थे, और उमर खालिद(Umar Khalid)भी उस प्रोटेस्ट में शामिल थे। इसी मामले में दोनों को जेल भी गए,मगर घटना के इतने सालो के बाद भी अब तक चार्जशीट नहीं लगाई जा सकी।
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Umar Khalid, Jignesh Mevani, Kanhaiya Kumar(from left to right)

 उमर खालिद(Umar Khalid) पर 2018 में जानलेवा हमला भी हुआ जिसके बाद दो लोग को हरियाणा के फतेहाबाद से गिरफ्तार किया गया। कनैह्या और उमर अपने तीखे और नुकीले शब्द प्रहार के लिए जाने जाते है। 2019 में कन्हैया कुमार (Kanhaiya kumar) ने चुनाव लड़ा मगर वह चुनाव हार गए। कन्हैया(Kanhaiya Kumar) के बारे में ब्रिटिश न्यूज़ चैनल बीबीसी(BBC) ने 11 मार्च 2016 को लिखा 'भारत(India) का सबसे ज्यादा प्यार और घृणा पाने वाला छात्र।' का के खिलाफ होने वाले आंदोलन में कनैह्या का गया 'आज़ादी गीत' देश के हर हिस्से में गया जा रहा है

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