Arab/Middle East में इतनी दिलचस्बी क्यों रखता है America

Saudi Arab and America relation

सऊदी अरब(Saudi Arab) के साथ-साथ बाकि के अरब(Arab) मुल्क के मामलो में अमेरिका(America) का हस्तक्षेप बार-बार देखने को मिलता है.  'मुस्लिम हेट अस' कहने वाले ट्रम्प(Donald Trump) भी जब राष्ट्रपति बने तो अपनी पहली विदेश यात्रा में सऊदी(Saudi Arab) को ही गए.मगर यह जानना  जरुरी है की आखिर अमेरिका के लिए अरब इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

किसी देश की मजबूती उसकी अर्थवयवस्था (Economy) से देखी जा सकती है और अर्थवयवस्था ऊर्जा के संसाधनों  पर निर्भर करती है और मध्य एशिया(Middle East) में ऊर्जा के भरपूर संसाधन उपलब्ध है। शायद यही कारण है की अमेरिका मध्य एशिया(Asia) के मामलो में ज्यादा रूचि दिखता है.

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Saudi Crown Prince with American President Trump


1944 में हुए एंग्लो अमेरिकन पेट्रोलियम एग्रीमेंट(Anglo-American Petroleum Agreement)  यु तो अमेरिका और ब्रिटेन के बीच एक असफल प्रयास था मगर उसके बाद मध्य एशिया(Middle East) में अमेरिका का दखल बढ़ गया। यही कारण है  द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद मधय एशिया(Middle East) में हुए हर मामलो में अमेरिका का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष हस्तक्षेप देखने को मिलता है। चाहे वो इसराइल (Israel) का बनना हो, ईरान-इराक वार (Iran Iraq war) हो या फिर सऊदी-यमन वार (Saudi-Yaman War) अमेरिका ने हर बार अपना पक्ष चुना है.

1967  में हुए अरब-इसराइल वॉर (Arab-Israel war)  में जब इसराइल(Israel) अरब मुल्को से लड़ रहा था, तब अमेरिका ने इसराइल की खूब मदद की और अमेरिकी हथियारों के मदद से इसराइल(Israel) युद्ध जितने में कामयाब हुआ.

 1980 -1988 के बीच ईरान- इराक युद्ध(Iran-Iraq War) में अमेरिका(America) इराक के साथ खड़ा था। तो वही सऊदी अरब(Saudi Arbia) और यमन(Yaman) में हुए युद्ध में जब यमन(Yaman) में भरी त्रासदी हुई  तब दुनिया भर में इसकी निंदा की गई.

 इस युद्ध में भी अमेरिका पर सऊदी(Saudi Arab) का साथ देने का आरोप है। हथियारों के साथ-साथ अमेरिका खाड़ी के देशो को सैन्य सेवाएं भी देता रहा है और बदले में उसे इन देशो का साथ और उनके तेल के कुए मिले है.

मगर पिछले कुछ सालो में तुर्की(Turkey), ईरान(Iran) और रूस(Russia) ने मध्य एशिया में अपनी सक्रियता बधाई है। ईरान ने जहा एक  तरफ सीरिया(Syria) और इराक(Iraq) में सैन्य करवाईयां की है तो दूसरी तरफ अमेरिका(America) के भारी विरोध और प्रतिबन्ध के बाद भी तुर्की(Turkey) सीरिया में कूर्द लड़ाकों को खदेड़ कर 'सेफज़ोन' बनाने में कामयाब हो गया। लीबिया में भी जब सरकार ने आग्रह किया तो तुर्की ने लीबिया(Libia) में सैन्य मदद देने का भी ऐलान कर दिया.
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Prince Mohammad bin Salman With Russian President Putin

इन सब के बीच रूस की अमेरिका(America) के सबसे करीबी मित्र देश माने जाने वाले सऊदी अरब(Saudi Arab) से नजदीकियां बढ़ने लगी है। रूस ने तुर्की(Turkey) और ईरान(Iran) को भी हथियार बेचे है.

  सीधे शब्दो में कहे तो अमेरिका(America) की जमीन मध्य एशिया में सिमटने लगी है, इसे चाहे आप ट्रम्प की कूटनीतिक विफलता कहे या फिर वक्त का तकाजा।मध्य एशिया में अमेरिका का प्रभाव कम हुआ है. 
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