Imran Pratapgadi वो शायर जो कभी इश्क लिखता था अब दर्द गाता है

कौन है इमरान प्रतापगडी  (Kaun hai Imran Pratapgadi)

इमरान प्रतापगडी(Imran Pratapgadi) उर्दू अदब में एक जाना माना नाम है। जब भी उर्दू या शायरी की बात होती है तो इसे महबूब की खूबसूरती और हुश्न की तारीफ का जरिया समझ लिया जाता है। शायद ऐसा इसलिए भी होता है क्योकि हम तक उर्दू की वही शायरी पहुँचती है जिसमे महबूब, मोहब्बत और उसके हुश्न हो। मगर उर्दू इससे अलग भी बहुत कुछ है। साहित्य को समाज का दर्पण माना जाता है और जब भी जरुरत पड़ी साहित्य ने इंकलाब की सरपरस्ती की है। अगर आप तारीख देखे तो ऐसे कई शायर, लेखक और कवी मिलेंगे जिनकी शायरी और रचनाओं ने इंकलाब की चिंगारी को भड़काया है।

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Imran Pratapgadi

ऐसे ही एक इंकलाबी शायर है "इमरान प्रतापगढ़ी(Imran Pratapgadi)"। प्रतापगढ़ में जन्मे इमरान इलहाबाद यूनिवर्सिटी से हिंदी साहित्य में मास्टर की डिग्री ली है। बचपन से ही इमरान को  शायरी का शौक था और वह अपने आस पास होने वाले हर मुशायरे और कवी सम्मेलनों में सुनने जाया करते थे। अपने कॉलेज के समय से ही इमरान कविता और शायरी लिखने लगे। धीरे- धीरे वह मुशायरे और कवी सम्मेलनों में अपनी नज्मे भी पढ़ने लगे। कवी शैलेश लोढ़ा के मसहूर TV शो 'क्या बात है' में इमरान ने 'नहाना तेरा पानी में...' नाम का एक गीत पढ़ा जिसकी खूब चर्चा हुई और इमरान से इस गीत के गाने की फरमाइश हर मुशायरे में होने लगी। इमरान ने इसके आलावा भी इश्क की कई गीत लिखे।

मगर सच्चा कवी/शायर वह होता है जो समाज का सच लिखने से अपने कलम को न रोके। 2008 के बाद इमरान प्रतापगडी( Imran Pratapgadi) ने अपने कलम की दिशा और दशा दोनों ही बदल दी । यह वह समय था जब आतंकी हमलो के तार देश के मदरसो से जोड़े जाने लगे थे, TV पर मदरसो को लेकर डिबेट करायी जाने लगी तब इमरान ने नज्म लिखा

 "मत जोड़ो आतंकवाद का नाम मदरसो से
कोई इल्जाम मदरसो से..."

इमरान प्रतापगडी(Imran Pratapgadi) की ये नज्म उनको मुशायरो का हीरो बना दिया और इमरान की पहचान एक इंकलाबी शायर की तरह होने लगी। इसके बाद इमरान ने कभी पलट कर नहीं देखे और अपने कलम को बड़ी बेबाकी से मजलूमों की आवाज बना कर चलते रहे इमरान ने कश्मीर, फिलिस्तीन, नजीब और अखलाख पर अपनी नज्मे लिखी। इमरान ने सियासत की चकाचौध में ओढ़े मुँह गिरी अखबारों का वह काम किया जिसका जिम्मा पत्रकारों का होता है। इस बात को इमरान ने शायरी में कहा है-

"मुझको जालिम का तरफदार नहीं लिख सकते।
कम से कम वो मुझे लाचार नहीं लिख सकते।।
जां हथेली पर लिए बोल रहा हूँ जो सच।
उसको इस देश के अखबार नहीं लिख सकते।।"
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साहित्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने 2016 में उन्हें सूबे की सबसे बड़ा सम्मान 'यश भारती' से सम्मानित किया। मगर इस बीच इमरान कई लोगे के आखो में गड़ने भी लगे। इमरान ने लिखा है-

"चलती बन्दूक के हम दहाने पे हैं,
 हमको मालूम है हम निशाने पे हैं।"

इमरान प्रतापगडी (Imran Pratapgadi) अब इस बात को जान चुके थे की मजलूमों और गरीबो की आवाज उठाने के लिए मुशायरे और कवी सम्मेलनों का यह मंच छोटा है और अगर उन्हें कुछ बेहतर करना है तो आगे बढ़ना ही होगा, तब इमरान सियासत में फैली गंदगी को साफ़ करने के लिए अपने पाजामे को घुटने तक चढ़ा लिया और सियासत में कूद पड़े। 2019 के आम चुनाव मे इमरान को कांग्रेस पार्टी ने 'पीतल नगरी मुरादाबाद' से अपना चेहरा बनाया मगर सियासत में नया होने के कारण इमरान सियासी दाव-पेच को भाप नहीं पाए और चुनाव हार गए। मगर इमरान ने मजलूमों के लिए लड़ना नहीं छोड़ा और अपनी कलम से मजलूमो की कहनी लिखते रहे।

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जब सरकार ने संविधान विरोधी CAA को पेस किया तो इमरान उन चन्द सेलिब्रिटी में से थे जिन्होंने इसके खिलाफ न सिर्फ आवाज उठाई बल्कि जमीनी आंदोलन से भी जुड़े। दिल्ली में जब जामिया के छात्रों को लाइब्रेरी में घुस कर मारा गया तो इमरान उसके विरोध में दिल्ली हेडक़्वाटर पर रात के 1 बजे धरना दे रहे थे। इमरान ने बिहार, मध्यप्रदेश से लेकर मुंबई और उत्तर प्रदेश तक CAA के खिलाफ बिगुल फुख रखा है।CAA के विरोध में इमरान का नारा है-

"आवाज दो- हम एक है!"
"हिन्दू -मुस्लिम- सिख -ईसाई
आपस में हम भाई-भाई"
"इंकलाब-जिंदाबाद।"
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